सूक्त ७६
12 मन्त्रों वाला सम्पूर्ण ऋग्वेद सूक्त: संस्कृत पाठ, IAST लिप्यन्तरण और उपलब्ध स्रोत-संगत ऐतिहासिक अंग्रेज़ी अनुवाद।
12 मन्त्रों वाला सम्पूर्ण ऋग्वेद सूक्त: संस्कृत पाठ, IAST लिप्यन्तरण और उपलब्ध स्रोत-संगत ऐतिहासिक अंग्रेज़ी अनुवाद।
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इमं नु मायिनं हुव इन्द्रमीशानमोजसा। मरुत्वन्तं न वृञ्जसे॥
लिप्यन्तरणimaṁ nu māyinaṁ huva indramīśānamojasā | marutvantaṁ na vṛñjase ||
अयमिन्द्रो मरुत्सखा वि वृत्रस्याभिनच्छिरः। वज्रेण शतपर्वणा॥
लिप्यन्तरणayamindro marutsakhā vi vṛtrasyābhinacchiraḥ | vajreṇa śataparvaṇā ||
वावृधानो मरुत्सखेन्द्रो वि वृत्रमैरयत्। सृजन्समुद्रिया अपः॥
लिप्यन्तरणvāvṛdhāno marutsakhendro vi vṛtramairayat | sṛjansamudriyā apaḥ ||
अयं ह येन वा इदं स्वर्मरुत्वता जितम्। इन्द्रेण सोमपीतये॥
लिप्यन्तरणayaṁ ha yena vā idaṁ svarmarutvatā jitam | indreṇa somapītaye ||
मरुत्वन्तमृजीषिणमोजस्वन्तं विरप्शिनम्। इन्द्रं गीर्भिर्हवामहे॥
लिप्यन्तरणmarutvantamṛjīṣiṇamojasvantaṁ virapśinam | indraṁ gīrbhirhavāmahe ||
इन्द्रं प्रत्नेन मन्मना मरुत्वन्तं हवामहे। अस्य सोमस्य पीतये॥
लिप्यन्तरणindraṁ pratnena manmanā marutvantaṁ havāmahe | asya somasya pītaye ||
मरुत्वाँ इन्द्र मीढ्वः पिबा सोमं शतक्रतो। अस्मिन्यज्ञे पुरुष्टुत॥
लिप्यन्तरणmarutvā indra mīḍhvaḥ pibā somaṁ śatakrato | asminyajñe puruṣṭuta ||
तुभ्येदिन्द्र मरुत्वते सुताः सोमासो अद्रिवः। हृदा हूयन्त उक्थिनः॥
लिप्यन्तरणtubhyedindra marutvate sutāḥ somāso adrivaḥ | hṛdā hūyanta ukthinaḥ ||
पिबेदिन्द्र मरुत्सखा सुतं सोमं दिविष्टिषु। वज्रं शिशान ओजसा॥
लिप्यन्तरणpibedindra marutsakhā sutaṁ somaṁ diviṣṭiṣu | vajraṁ śiśāna ojasā ||
उत्तिष्ठन्नोजसा सह पीत्वी शिप्रे अवेपयः। सोममिन्द्र चमू सुतम्॥
लिप्यन्तरणuttiṣṭhannojasā saha pītvī śipre avepayaḥ | somamindra camū sutam ||
अनु त्वा रोदसी उभे क्रक्षमाणमकृपेताम्। इन्द्र यद्दस्युहाभवः॥
लिप्यन्तरणanu tvā rodasī ubhe krakṣamāṇamakṛpetām | indra yaddasyuhābhavaḥ ||
वाचमष्टापदीमहं नवस्रक्तिमृतस्पृशम्। इन्द्रात्परि तन्वं ममे॥
लिप्यन्तरणvācamaṣṭāpadīmahaṁ navasraktimṛtaspṛśam | indrātpari tanvaṁ mame ||
सूक्त ७६ सनातन धर्म ज्ञान-मानचित्र का एक बिन्दु है। यह पृष्ठ इसे उसके शास्त्रीय, दार्शनिक या जीवंत परम्परा के सन्दर्भ में रखता है और इसकी शाखाओं, स्रोतों तथा सम्बन्धित मार्गों से जोड़ता है।