सूक्त ७५
16 मन्त्रों वाला सम्पूर्ण ऋग्वेद सूक्त: संस्कृत पाठ, IAST लिप्यन्तरण और उपलब्ध स्रोत-संगत ऐतिहासिक अंग्रेज़ी अनुवाद।
16 मन्त्रों वाला सम्पूर्ण ऋग्वेद सूक्त: संस्कृत पाठ, IAST लिप्यन्तरण और उपलब्ध स्रोत-संगत ऐतिहासिक अंग्रेज़ी अनुवाद।
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युक्ष्वा हि देवहूतमाँ अश्वाँ अग्ने रथीरिव। नि होता पूर्व्यः सदः॥
लिप्यन्तरणyukṣvā hi devahūtamā aśvā agne rathīriva | ni hotā pūrvyaḥ sadaḥ ||
उत नो देव देवाँ अच्छा वोचो विदुष्टरः। श्रद्विश्वा वार्या कृधि॥
लिप्यन्तरणuta no deva devā acchā voco viduṣṭaraḥ | śradviśvā vāryā kṛdhi ||
त्वं ह यद्यविष्ठ्य सहसः सूनवाहुत। ऋतावा यज्ञियो भुवः॥
लिप्यन्तरणtvaṁ ha yadyaviṣṭhya sahasaḥ sūnavāhuta | ṛtāvā yajñiyo bhuvaḥ ||
अयमग्निः सहस्रिणो वाजस्य शतिनस्पतिः। मूर्धा कवी रयीणाम्॥
लिप्यन्तरणayamagniḥ sahasriṇo vājasya śatinaspatiḥ | mūrdhā kavī rayīṇām ||
तं नेमिमृभवो यथा नमस्व सहूतिभिः। नेदीयो यज्ञमङ्गिरः॥
लिप्यन्तरणtaṁ nemimṛbhavo yathā namasva sahūtibhiḥ | nedīyo yajñamaṅgiraḥ ||
तस्मै नूनमभिद्यवे वाचा विरूप नित्यया। वृष्णे चोदस्व सुष्टुतिम्॥
लिप्यन्तरणtasmai nūnamabhidyave vācā virūpa nityayā | vṛṣṇe codasva suṣṭutim ||
कमु ष्विदस्य सेनयाग्नेरपाकचक्षसः। पणिं गोषु स्तरामहे॥
लिप्यन्तरणkamu ṣvidasya senayāgnerapākacakṣasaḥ | paṇiṁ goṣu starāmahe ||
मा नो देवानां विशः प्रस्नातीरिवोस्राः। कृशं न हासुरघ्न्याः॥
लिप्यन्तरणmā no devānāṁ viśaḥ prasnātīrivosrāḥ | kṛśaṁ na hāsuraghnyāḥ ||
मा नः समस्य दूढ्यः परिद्वेषसो अंहतिः। ऊर्मिर्न नावमा वधीत्॥
लिप्यन्तरणmā naḥ samasya dūḍhyaḥ paridveṣaso aṁhatiḥ | ūrmirna nāvamā vadhīt ||
नमस्ते अग्न ओजसे गृणन्ति देव कृष्टयः। अमैरमित्रमर्दय॥
लिप्यन्तरणnamaste agna ojase gṛṇanti deva kṛṣṭayaḥ | amairamitramardaya ||
कुवित्सु नो गविष्टयेऽग्ने संवेषिषो रयिम्। उरुकृदुरु णस्कृधि॥
लिप्यन्तरणkuvitsu no gaviṣṭaye'gne saṁveṣiṣo rayim | urukṛduru ṇaskṛdhi ||
मा नो अस्मिन्महाधने परा वर्ग्भारभृद्यथा। संवर्गं सं रयिं जय॥
लिप्यन्तरणmā no asminmahādhane parā vargbhārabhṛdyathā | saṁvargaṁ saṁ rayiṁ jaya ||
अन्यमस्मद्भिया इयमग्ने सिषक्तु दुच्छुना। वर्धा नो अमवच्छवः॥
लिप्यन्तरणanyamasmadbhiyā iyamagne siṣaktu ducchunā | vardhā no amavacchavaḥ ||
यस्याजुषन्नमस्विनः शमीमदुर्मखस्य वा। तं घेदग्निर्वृधावति॥
लिप्यन्तरणyasyājuṣannamasvinaḥ śamīmadurmakhasya vā | taṁ ghedagnirvṛdhāvati ||
परस्या अधि संवतोऽवराँ अभ्या तर। यत्राहमस्मि ताँ अव॥
लिप्यन्तरणparasyā adhi saṁvato'varā abhyā tara | yatrāhamasmi tā ava ||
विद्मा हि ते पुरा वयमग्ने पितुर्यथावसः। अधा ते सुम्नमीमहे॥
लिप्यन्तरणvidmā hi te purā vayamagne pituryathāvasaḥ | adhā te sumnamīmahe ||
सूक्त ७५ सनातन धर्म ज्ञान-मानचित्र का एक बिन्दु है। यह पृष्ठ इसे उसके शास्त्रीय, दार्शनिक या जीवंत परम्परा के सन्दर्भ में रखता है और इसकी शाखाओं, स्रोतों तथा सम्बन्धित मार्गों से जोड़ता है।