सूक्त ५५
5 मन्त्रों वाला सम्पूर्ण ऋग्वेद सूक्त: संस्कृत पाठ, IAST लिप्यन्तरण और उपलब्ध स्रोत-संगत ऐतिहासिक अंग्रेज़ी अनुवाद।
5 मन्त्रों वाला सम्पूर्ण ऋग्वेद सूक्त: संस्कृत पाठ, IAST लिप्यन्तरण और उपलब्ध स्रोत-संगत ऐतिहासिक अंग्रेज़ी अनुवाद।
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5 मन्त्रों वाला सम्पूर्ण ऋग्वेद सूक्त: संस्कृत पाठ, IAST लिप्यन्तरण और उपलब्ध स्रोत-संगत ऐतिहासिक अंग्रेज़ी अनुवाद।
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भूरीदिन्द्रस्य वीर्यं व्यख्यमभ्यायति। राधस्ते दस्यवे वृक॥
लिप्यन्तरणbhūrīdindrasya vīryaṁ vyakhyamabhyāyati | rādhaste dasyave vṛka ||
शतं श्वेतास उक्षणो दिवि तारो न रोचन्ते। मह्ना दिवं न तस्तभुः॥
लिप्यन्तरणśataṁ śvetāsa ukṣaṇo divi tāro na rocante | mahnā divaṁ na tastabhuḥ ||
शतं वेणूञ्छतं शुनः शतं चर्माणि म्लातानि। शतं मे बल्बजस्तुका अरुषीणां चतुःशतम्॥
लिप्यन्तरणśataṁ veṇūñchataṁ śunaḥ śataṁ carmāṇi mlātāni | śataṁ me balbajastukā aruṣīṇāṁ catuḥśatam ||
सुदेवाः स्थ काण्वायना वयोवयो विचरन्तः। अश्वासो न चङ्क्रमत॥
लिप्यन्तरणsudevāḥ stha kāṇvāyanā vayovayo vicarantaḥ | aśvāso na caṅkramata ||
आदित्साप्तस्य चर्किरन्नानूनस्य महि श्रवः। श्यावीरतिध्वसन्पथश्चक्षुषा चन संनशे॥
लिप्यन्तरणāditsāptasya carkirannānūnasya mahi śravaḥ | śyāvīratidhvasanpathaścakṣuṣā cana saṁnaśe ||
सूक्त ५५ सनातन धर्म ज्ञान-मानचित्र का एक बिन्दु है। यह पृष्ठ इसे उसके शास्त्रीय, दार्शनिक या जीवंत परम्परा के सन्दर्भ में रखता है और इसकी शाखाओं, स्रोतों तथा सम्बन्धित मार्गों से जोड़ता है।