सूक्त ५६
5 मन्त्रों वाला सम्पूर्ण ऋग्वेद सूक्त: संस्कृत पाठ, IAST लिप्यन्तरण और उपलब्ध स्रोत-संगत ऐतिहासिक अंग्रेज़ी अनुवाद।
5 मन्त्रों वाला सम्पूर्ण ऋग्वेद सूक्त: संस्कृत पाठ, IAST लिप्यन्तरण और उपलब्ध स्रोत-संगत ऐतिहासिक अंग्रेज़ी अनुवाद।
गहराई 4 / 4
5 मन्त्रों वाला सम्पूर्ण ऋग्वेद सूक्त: संस्कृत पाठ, IAST लिप्यन्तरण और उपलब्ध स्रोत-संगत ऐतिहासिक अंग्रेज़ी अनुवाद।
बटन, स्वाइप या बाएँ-दाएँ तीर कुंजियों से पृष्ठ पलटें।
प्रति ते दस्यवे वृक राधो अदर्श्यह्रयम्। द्यौर्न प्रथिना शवः॥
लिप्यन्तरणprati te dasyave vṛka rādho adarśyahrayam | dyaurna prathinā śavaḥ ||
दश मह्यं पौतक्रतः सहस्रा दस्यवे वृकः। नित्याद्रायो अमंहत॥
लिप्यन्तरणdaśa mahyaṁ pautakrataḥ sahasrā dasyave vṛkaḥ | nityādrāyo amaṁhata ||
शतं मे गर्दभानां शतमूर्णावतीनाम्। शतं दासाँ अति स्रजः॥
लिप्यन्तरणśataṁ me gardabhānāṁ śatamūrṇāvatīnām | śataṁ dāsā ati srajaḥ ||
तत्रो अपि प्राणीयत पूतक्रतायै व्यक्ता। अश्वानामिन्न यूथ्याम्॥
लिप्यन्तरणtatro api prāṇīyata pūtakratāyai vyaktā | aśvānāminna yūthyām ||
अचेत्यग्निश्चिकितुर्हव्यवाट् स सुमद्रथः। अग्निः शुक्रेण शोचिषा बृहत्सूरो अरोचत दिवि सूर्यो अरोचत॥
लिप्यन्तरणacetyagniścikiturhavyavāṭ sa sumadrathaḥ | agniḥ śukreṇa śociṣā bṛhatsūro arocata divi sūryo arocata ||
सूक्त ५६ सनातन धर्म ज्ञान-मानचित्र का एक बिन्दु है। यह पृष्ठ इसे उसके शास्त्रीय, दार्शनिक या जीवंत परम्परा के सन्दर्भ में रखता है और इसकी शाखाओं, स्रोतों तथा सम्बन्धित मार्गों से जोड़ता है।