text

सूक्त ९८

12 मन्त्रों वाला सम्पूर्ण ऋग्वेद सूक्त: संस्कृत पाठ, IAST लिप्यन्तरण और उपलब्ध स्रोत-संगत ऐतिहासिक अंग्रेज़ी अनुवाद।

गहराई 4 / 4

स्रोत-सन्दर्भ तैयार
बहुभाषी सामग्री मॉडल तैयार
ज्ञान-परीक्षण मार्ग तैयार
डिजिटल ग्रन्थ संस्करण
विषय-सूची
डिजिटल ग्रन्थ संस्करण

सूक्त ९८

12 मन्त्रों वाला सम्पूर्ण ऋग्वेद सूक्त: संस्कृत पाठ, IAST लिप्यन्तरण और उपलब्ध स्रोत-संगत ऐतिहासिक अंग्रेज़ी अनुवाद।

पृष्ठ 1 में से 14
आपका स्थान सुरक्षित है

बटन, स्वाइप या बाएँ-दाएँ तीर कुंजियों से पृष्ठ पलटें।

निरन्तर पाठ के रूप में पढ़ें

Rigveda 8.98.1

Rigveda 8.98.1
मूल पाठ

इन्द्राय साम गायत विप्राय बृहते बृहत्। धर्मकृते विपश्चिते पनस्यवे॥

लिप्यन्तरण

indrāya sāma gāyata viprāya bṛhate bṛhat | dharmakṛte vipaścite panasyave ||

Rigveda 8.98.2

Rigveda 8.98.2
मूल पाठ

त्वमिन्द्राभिभूरसि त्वं सूर्यमरोचयः। विश्वकर्मा विश्वदेवो महाँ असि॥

लिप्यन्तरण

tvamindrābhibhūrasi tvaṁ sūryamarocayaḥ | viśvakarmā viśvadevo mahā asi ||

Rigveda 8.98.3

Rigveda 8.98.3
मूल पाठ

विभ्राजञ्ज्योतिषा स्वरगच्छो रोचनं दिवः। देवास्त इन्द्र सख्याय येमिरे॥

लिप्यन्तरण

vibhrājañjyotiṣā svaragaccho rocanaṁ divaḥ | devāsta indra sakhyāya yemire ||

Rigveda 8.98.4

Rigveda 8.98.4
मूल पाठ

एन्द्र नो गधि प्रियः सत्राजिदगोह्यः। गिरिर्न विश्वतस्पृथुः पतिर्दिवः॥

लिप्यन्तरण

endra no gadhi priyaḥ satrājidagohyaḥ | girirna viśvataspṛthuḥ patirdivaḥ ||

Rigveda 8.98.5

Rigveda 8.98.5
मूल पाठ

अभि हि सत्य सोमपा उभे बभूथ रोदसी। इन्द्रासि सुन्वतो वृधः पतिर्दिवः॥

लिप्यन्तरण

abhi hi satya somapā ubhe babhūtha rodasī | indrāsi sunvato vṛdhaḥ patirdivaḥ ||

Rigveda 8.98.6

Rigveda 8.98.6
मूल पाठ

त्वं हि शश्वतीनामिन्द्र दर्ता पुरामसि। हन्ता दस्योर्मनोर्वृधः पतिर्दिवः॥

लिप्यन्तरण

tvaṁ hi śaśvatīnāmindra dartā purāmasi | hantā dasyormanorvṛdhaḥ patirdivaḥ ||

Rigveda 8.98.7

Rigveda 8.98.7
मूल पाठ

अधा हीन्द्र गिर्वण उप त्वा कामान्महः ससृज्महे। उदेव यन्त उदभिः॥

लिप्यन्तरण

adhā hīndra girvaṇa upa tvā kāmānmahaḥ sasṛjmahe | udeva yanta udabhiḥ ||

Rigveda 8.98.8

Rigveda 8.98.8
मूल पाठ

वार्ण त्वा यव्याभिर्वर्धन्ति शूर ब्रह्माणि। वावृध्वांसं चिदद्रिवो दिवेदिवे॥

लिप्यन्तरण

vārṇa tvā yavyābhirvardhanti śūra brahmāṇi | vāvṛdhvāṁsaṁ cidadrivo divedive ||

Rigveda 8.98.9

Rigveda 8.98.9
मूल पाठ

युञ्जन्ति हरी इषिरस्य गाथयोरौ रथ उरुयुगे। इन्द्रवाहा वचोयुजा॥

लिप्यन्तरण

yuñjanti harī iṣirasya gāthayorau ratha uruyuge | indravāhā vacoyujā ||

Rigveda 8.98.10

Rigveda 8.98.10
मूल पाठ

त्वं न इन्द्रा भरँ ओजो नृम्णं शतक्रतो विचर्षणे। आ वीरं पृतनाषहम्॥

लिप्यन्तरण

tvaṁ na indrā bhara ojo nṛmṇaṁ śatakrato vicarṣaṇe | ā vīraṁ pṛtanāṣaham ||

Rigveda 8.98.11

Rigveda 8.98.11
मूल पाठ

त्वं हि नः पिता वसो त्वं माता शतक्रतो बभूविथ। अधा ते सुम्नमीमहे॥

लिप्यन्तरण

tvaṁ hi naḥ pitā vaso tvaṁ mātā śatakrato babhūvitha | adhā te sumnamīmahe ||

Rigveda 8.98.12

Rigveda 8.98.12
मूल पाठ

त्वां शुष्मिन्पुरुहूत वाजयन्तमुप ब्रुवे शतक्रतो। स नो रास्व सुवीर्यम्॥

लिप्यन्तरण

tvāṁ śuṣminpuruhūta vājayantamupa bruve śatakrato | sa no rāsva suvīryam ||

स्रोत और सम्पादकीय विवरण

  1. Rigveda Mandala 8, machine-readable Sanskrit and Roman textMandala 8Sanskrit Documents
  2. Rigveda Shakala Samhita, Mandala 8, Sukta 98RV 8.98Vedic Heritage Portal, Ministry of Culture, Government of India
एक स्पष्ट उत्तर

सामान्य प्रश्न

सूक्त ९८ क्या है?

सूक्त ९८ सनातन धर्म ज्ञान-मानचित्र का एक बिन्दु है। यह पृष्ठ इसे उसके शास्त्रीय, दार्शनिक या जीवंत परम्परा के सन्दर्भ में रखता है और इसकी शाखाओं, स्रोतों तथा सम्बन्धित मार्गों से जोड़ता है।