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सूक्त ९४

12 मन्त्रों वाला सम्पूर्ण ऋग्वेद सूक्त: संस्कृत पाठ, IAST लिप्यन्तरण और उपलब्ध स्रोत-संगत ऐतिहासिक अंग्रेज़ी अनुवाद।

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सूक्त ९४

12 मन्त्रों वाला सम्पूर्ण ऋग्वेद सूक्त: संस्कृत पाठ, IAST लिप्यन्तरण और उपलब्ध स्रोत-संगत ऐतिहासिक अंग्रेज़ी अनुवाद।

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Rigveda 8.94.1

Rigveda 8.94.1
मूल पाठ

गौर्धयति मरुतां श्रवस्युर्माता मघोनाम्। युक्ता वह्नी रथानाम्॥

लिप्यन्तरण

gaurdhayati marutāṁ śravasyurmātā maghonām | yuktā vahnī rathānām ||

Rigveda 8.94.2

Rigveda 8.94.2
मूल पाठ

यस्या देवा उपस्थे व्रता विश्वे धारयन्ते। सूर्यामासा दृशे कम्॥

लिप्यन्तरण

yasyā devā upasthe vratā viśve dhārayante | sūryāmāsā dṛśe kam ||

Rigveda 8.94.3

Rigveda 8.94.3
मूल पाठ

तत्सु नो विश्वे अर्य आ सदा गृणन्ति कारवः। मरुतः सोमपीतये॥

लिप्यन्तरण

tatsu no viśve arya ā sadā gṛṇanti kāravaḥ | marutaḥ somapītaye ||

Rigveda 8.94.4

Rigveda 8.94.4
मूल पाठ

अस्ति सोमो अयं सुतः पिबन्त्यस्य मरुतः। उत स्वराजो अश्विना॥

लिप्यन्तरण

asti somo ayaṁ sutaḥ pibantyasya marutaḥ | uta svarājo aśvinā ||

Rigveda 8.94.5

Rigveda 8.94.5
मूल पाठ

पिबन्ति मित्रो अर्यमा तना पूतस्य वरुणः। त्रिषधस्थस्य जावतः॥

लिप्यन्तरण

pibanti mitro aryamā tanā pūtasya varuṇaḥ | triṣadhasthasya jāvataḥ ||

Rigveda 8.94.6

Rigveda 8.94.6
मूल पाठ

उतो न्वस्य जोषमाँ इन्द्रः सुतस्य गोमतः। प्रातर्होतेव मत्सति॥

लिप्यन्तरण

uto nvasya joṣamā indraḥ sutasya gomataḥ | prātarhoteva matsati ||

Rigveda 8.94.7

Rigveda 8.94.7
मूल पाठ

कदत्विषन्त सूरयस्तिर आप इव स्रिधः। अर्षन्ति पूतदक्षसः॥

लिप्यन्तरण

kadatviṣanta sūrayastira āpa iva sridhaḥ | arṣanti pūtadakṣasaḥ ||

Rigveda 8.94.8

Rigveda 8.94.8
मूल पाठ

कद्वो अद्य महानां देवानामवो वृणे। त्मना च दस्मवर्चसाम्॥

लिप्यन्तरण

kadvo adya mahānāṁ devānāmavo vṛṇe | tmanā ca dasmavarcasām ||

Rigveda 8.94.9

Rigveda 8.94.9
मूल पाठ

आ ये विश्वा पार्थिवानि पप्रथन्रोचना दिवः। मरुतः सोमपीतये॥

लिप्यन्तरण

ā ye viśvā pārthivāni paprathanrocanā divaḥ | marutaḥ somapītaye ||

Rigveda 8.94.10

Rigveda 8.94.10
मूल पाठ

त्यान्नु पूतदक्षसो दिवो वो मरुतो हुवे। अस्य सोमस्य पीतये॥

लिप्यन्तरण

tyānnu pūtadakṣaso divo vo maruto huve | asya somasya pītaye ||

Rigveda 8.94.11

Rigveda 8.94.11
मूल पाठ

त्यान्नु ये वि रोदसी तस्तभुर्मरुतो हुवे। अस्य सोमस्य पीतये॥

लिप्यन्तरण

tyānnu ye vi rodasī tastabhurmaruto huve | asya somasya pītaye ||

Rigveda 8.94.12

Rigveda 8.94.12
मूल पाठ

त्यं नु मारुतं गणं गिरिष्ठां वृषणं हुवे। अस्य सोमस्य पीतये॥

लिप्यन्तरण

tyaṁ nu mārutaṁ gaṇaṁ giriṣṭhāṁ vṛṣaṇaṁ huve | asya somasya pītaye ||

स्रोत और सम्पादकीय विवरण

  1. Rigveda Mandala 8, machine-readable Sanskrit and Roman textMandala 8Sanskrit Documents
  2. Rigveda Shakala Samhita, Mandala 8, Sukta 94RV 8.94Vedic Heritage Portal, Ministry of Culture, Government of India
एक स्पष्ट उत्तर

सामान्य प्रश्न

सूक्त ९४ क्या है?

सूक्त ९४ सनातन धर्म ज्ञान-मानचित्र का एक बिन्दु है। यह पृष्ठ इसे उसके शास्त्रीय, दार्शनिक या जीवंत परम्परा के सन्दर्भ में रखता है और इसकी शाखाओं, स्रोतों तथा सम्बन्धित मार्गों से जोड़ता है।