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सूक्त ६४

12 मन्त्रसहित सम्पूर्ण ऋग्वेद सूक्त: संस्कृत पाठ, IAST लिप्यन्तरण र उपलब्ध स्रोतसँग मिलेका ऐतिहासिक अङ्ग्रेजी अनुवाद।

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सूक्त ६४

12 मन्त्रसहित सम्पूर्ण ऋग्वेद सूक्त: संस्कृत पाठ, IAST लिप्यन्तरण र उपलब्ध स्रोतसँग मिलेका ऐतिहासिक अङ्ग्रेजी अनुवाद।

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Rigveda 8.64.1

Rigveda 8.64.1
मूल पाठ

उत्त्वा मन्दन्तु स्तोमाः कृणुष्व राधो अद्रिवः। अव ब्रह्मद्विषो जहि॥

लिप्यन्तरण

uttvā mandantu stomāḥ kṛṇuṣva rādho adrivaḥ | ava brahmadviṣo jahi ||

Rigveda 8.64.2

Rigveda 8.64.2
मूल पाठ

पदा पणीँरराधसो नि बाधस्व महाँ असि। नहि त्वा कश्चन प्रति॥

लिप्यन्तरण

padā paṇīrarādhaso ni bādhasva mahā asi | nahi tvā kaścana prati ||

Rigveda 8.64.3

Rigveda 8.64.3
मूल पाठ

त्वमीशिषे सुतानामिन्द्र त्वमसुतानाम्। त्वं राजा जनानाम्॥

लिप्यन्तरण

tvamīśiṣe sutānāmindra tvamasutānām | tvaṁ rājā janānām ||

Rigveda 8.64.4

Rigveda 8.64.4
मूल पाठ

एहि प्रेहि क्षयो दिव्याघोषञ्चर्षणीनाम्। ओभे पृणासि रोदसी॥

लिप्यन्तरण

ehi prehi kṣayo divyāghoṣañcarṣaṇīnām | obhe pṛṇāsi rodasī ||

Rigveda 8.64.5

Rigveda 8.64.5
मूल पाठ

त्यं चित्पर्वतं गिरिं शतवन्तं सहस्रिणम्। वि स्तोतृभ्यो रुरोजिथ॥

लिप्यन्तरण

tyaṁ citparvataṁ giriṁ śatavantaṁ sahasriṇam | vi stotṛbhyo rurojitha ||

Rigveda 8.64.6

Rigveda 8.64.6
मूल पाठ

वयमु त्वा दिवा सुते वयं नक्तं हवामहे। अस्माकं काममा पृण॥

लिप्यन्तरण

vayamu tvā divā sute vayaṁ naktaṁ havāmahe | asmākaṁ kāmamā pṛṇa ||

Rigveda 8.64.7

Rigveda 8.64.7
मूल पाठ

क्व स्य वृषभो युवा तुविग्रीवो अनानतः। ब्रह्मा कस्तं सपर्यति॥

लिप्यन्तरण

kva sya vṛṣabho yuvā tuvigrīvo anānataḥ | brahmā kastaṁ saparyati ||

Rigveda 8.64.8

Rigveda 8.64.8
मूल पाठ

कस्य स्वित्सवनं वृषा जुजुष्वाँ अव गच्छति। इन्द्रं क उ स्विदा चके॥

लिप्यन्तरण

kasya svitsavanaṁ vṛṣā jujuṣvā ava gacchati | indraṁ ka u svidā cake ||

Rigveda 8.64.9

Rigveda 8.64.9
मूल पाठ

कं ते दाना असक्षत वृत्रहन्कं सुवीर्या। उक्थे क उ स्विदन्तमः॥

लिप्यन्तरण

kaṁ te dānā asakṣata vṛtrahankaṁ suvīryā | ukthe ka u svidantamaḥ ||

Rigveda 8.64.10

Rigveda 8.64.10
मूल पाठ

अयं ते मानुषे जने सोमः पूरुषु सूयते। तस्येहि प्र द्रवा पिब॥

लिप्यन्तरण

ayaṁ te mānuṣe jane somaḥ pūruṣu sūyate | tasyehi pra dravā piba ||

Rigveda 8.64.11

Rigveda 8.64.11
मूल पाठ

अयं ते शर्यणावति सुषोमायामधि प्रियः। आर्जीकीये मदिन्तमः॥

लिप्यन्तरण

ayaṁ te śaryaṇāvati suṣomāyāmadhi priyaḥ | ārjīkīye madintamaḥ ||

Rigveda 8.64.12

Rigveda 8.64.12
मूल पाठ

तमद्य राधसे महे चारुं मदाय घृष्वये। एहीमिन्द्र द्रवा पिब॥

लिप्यन्तरण

tamadya rādhase mahe cāruṁ madāya ghṛṣvaye | ehīmindra dravā piba ||

स्रोत र सम्पादकीय विवरण

  1. Rigveda Mandala 8, machine-readable Sanskrit and Roman textMandala 8Sanskrit Documents
  2. Rigveda Shakala Samhita, Mandala 8, Sukta 64RV 8.64Vedic Heritage Portal, Ministry of Culture, Government of India
एउटा स्पष्ट उत्तर

सामान्य प्रश्न

सूक्त ६४ के हो?

सूक्त ६४ सनातन धर्म ज्ञान-मानचित्रको एउटा बिन्दु हो। यस पृष्ठले यसलाई शास्त्रीय, दार्शनिक वा जीवन्त परम्पराको सन्दर्भमा राख्छ र यसका शाखा, स्रोत तथा सम्बन्धित मार्गसँग जोड्छ।