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सूक्त २६

25 मन्त्रसहित सम्पूर्ण ऋग्वेद सूक्त: संस्कृत पाठ, IAST लिप्यन्तरण र उपलब्ध स्रोतसँग मिलेका ऐतिहासिक अङ्ग्रेजी अनुवाद।

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सूक्त २६

25 मन्त्रसहित सम्पूर्ण ऋग्वेद सूक्त: संस्कृत पाठ, IAST लिप्यन्तरण र उपलब्ध स्रोतसँग मिलेका ऐतिहासिक अङ्ग्रेजी अनुवाद।

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Rigveda 8.26.1

Rigveda 8.26.1
मूल पाठ

युवोरु षू रथं हुवे सधस्तुत्याय सूरिषु। अतूर्तदक्षा वृषणा वृषण्वसू॥

लिप्यन्तरण

yuvoru ṣū rathaṁ huve sadhastutyāya sūriṣu | atūrtadakṣā vṛṣaṇā vṛṣaṇvasū ||

Rigveda 8.26.2

Rigveda 8.26.2
मूल पाठ

युवं वरो सुषाम्णे महे तने नासत्या। अवोभिर्याथो वृषणा वृषण्वसू॥

लिप्यन्तरण

yuvaṁ varo suṣāmṇe mahe tane nāsatyā | avobhiryātho vṛṣaṇā vṛṣaṇvasū ||

Rigveda 8.26.3

Rigveda 8.26.3
मूल पाठ

ता वामद्य हवामहे हव्येभिर्वाजिनीवसू। पूर्वीरिष इषयन्तावति क्षपः॥

लिप्यन्तरण

tā vāmadya havāmahe havyebhirvājinīvasū | pūrvīriṣa iṣayantāvati kṣapaḥ ||

Rigveda 8.26.4

Rigveda 8.26.4
मूल पाठ

आ वां वाहिष्ठो अश्विना रथो यातु श्रुतो नरा। उप स्तोमान्तुरस्य दर्शथः श्रिये॥

लिप्यन्तरण

ā vāṁ vāhiṣṭho aśvinā ratho yātu śruto narā | upa stomānturasya darśathaḥ śriye ||

Rigveda 8.26.5

Rigveda 8.26.5
मूल पाठ

जुहुराणा चिदश्विना मन्येथां वृषण्वसू। युवं हि रुद्रा पर्षथो अति द्विषः॥

लिप्यन्तरण

juhurāṇā cidaśvinā manyethāṁ vṛṣaṇvasū | yuvaṁ hi rudrā parṣatho ati dviṣaḥ ||

Rigveda 8.26.6

Rigveda 8.26.6
मूल पाठ

दस्रा हि विश्वमानुषङ्मक्षूभिः परिदीयथः। धियंजिन्वा मधुवर्णा शुभस्पती॥

लिप्यन्तरण

dasrā hi viśvamānuṣaṅmakṣūbhiḥ paridīyathaḥ | dhiyaṁjinvā madhuvarṇā śubhaspatī ||

Rigveda 8.26.7

Rigveda 8.26.7
मूल पाठ

उप नो यातमश्विना राया विश्वपुषा सह। मघवाना सुवीरावनपच्युता॥

लिप्यन्तरण

upa no yātamaśvinā rāyā viśvapuṣā saha | maghavānā suvīrāvanapacyutā ||

Rigveda 8.26.8

Rigveda 8.26.8
मूल पाठ

आ मे अस्य प्रतीव्यमिन्द्रनासत्या गतम्। देवा देवेभिरद्य सचनस्तमा॥

लिप्यन्तरण

ā me asya pratīvyamindranāsatyā gatam | devā devebhiradya sacanastamā ||

Rigveda 8.26.9

Rigveda 8.26.9
मूल पाठ

वयं हि वां हवामह उक्षण्यन्तो व्यश्ववत्। सुमतिभिरुप विप्राविहा गतम्॥

लिप्यन्तरण

vayaṁ hi vāṁ havāmaha ukṣaṇyanto vyaśvavat | sumatibhirupa viprāvihā gatam ||

Rigveda 8.26.10

Rigveda 8.26.10
मूल पाठ

अश्विना स्वृषे स्तुहि कुवित्ते श्रवतो हवम्। नेदीयसः कूळयातः पणीँरुत॥

लिप्यन्तरण

aśvinā svṛṣe stuhi kuvitte śravato havam | nedīyasaḥ kūḻayātaḥ paṇīruta ||

Rigveda 8.26.11

Rigveda 8.26.11
मूल पाठ

वैयश्वस्य श्रुतं नरोतो मे अस्य वेदथः। सजोषसा वरुणो मित्रो अर्यमा॥

लिप्यन्तरण

vaiyaśvasya śrutaṁ naroto me asya vedathaḥ | sajoṣasā varuṇo mitro aryamā ||

Rigveda 8.26.12

Rigveda 8.26.12
मूल पाठ

युवादत्तस्य धिष्ण्या युवानीतस्य सूरिभिः। अहरहर्वृषण मह्यं शिक्षतम्॥

लिप्यन्तरण

yuvādattasya dhiṣṇyā yuvānītasya sūribhiḥ | aharaharvṛṣaṇa mahyaṁ śikṣatam ||

Rigveda 8.26.13

Rigveda 8.26.13
मूल पाठ

यो वां यज्ञेभिरावृतोऽधिवस्त्रा वधूरिव। सपर्यन्ता शुभे चक्राते अश्विना॥

लिप्यन्तरण

yo vāṁ yajñebhirāvṛto'dhivastrā vadhūriva | saparyantā śubhe cakrāte aśvinā ||

Rigveda 8.26.14

Rigveda 8.26.14
मूल पाठ

यो वामुरुव्यचस्तमं चिकेतति नृपाय्यम्। वर्तिरश्विना परि यातमस्मयू॥

लिप्यन्तरण

yo vāmuruvyacastamaṁ ciketati nṛpāyyam | vartiraśvinā pari yātamasmayū ||

Rigveda 8.26.15

Rigveda 8.26.15
मूल पाठ

अस्मभ्यं सु वृषण्वसू यातं वर्तिर्नृपाय्यम्। विषुद्रुहेव यज्ञमूहथुर्गिरा॥

लिप्यन्तरण

asmabhyaṁ su vṛṣaṇvasū yātaṁ vartirnṛpāyyam | viṣudruheva yajñamūhathurgirā ||

Rigveda 8.26.16

Rigveda 8.26.16
मूल पाठ

वाहिष्ठो वां हवानां स्तोमो दूतो हुवन्नरा। युवाभ्यां भूत्वश्विना॥

लिप्यन्तरण

vāhiṣṭho vāṁ havānāṁ stomo dūto huvannarā | yuvābhyāṁ bhūtvaśvinā ||

Rigveda 8.26.17

Rigveda 8.26.17
मूल पाठ

यददो दिवो अर्णव इषो वा मदथो गृहे। श्रुतमिन्मे अमर्त्या॥

लिप्यन्तरण

yadado divo arṇava iṣo vā madatho gṛhe | śrutaminme amartyā ||

Rigveda 8.26.18

Rigveda 8.26.18
मूल पाठ

उत स्या श्वेतयावरी वाहिष्ठा वां नदीनाम्। सिन्धुर्हिरण्यवर्तनिः॥

लिप्यन्तरण

uta syā śvetayāvarī vāhiṣṭhā vāṁ nadīnām | sindhurhiraṇyavartaniḥ ||

Rigveda 8.26.19

Rigveda 8.26.19
मूल पाठ

स्मदेतया सुकीर्त्याश्विना श्वेतया धिया। वहेथे शुभ्रयावाना॥

लिप्यन्तरण

smadetayā sukīrtyāśvinā śvetayā dhiyā | vahethe śubhrayāvānā ||

Rigveda 8.26.20

Rigveda 8.26.20
मूल पाठ

युक्ष्वा हि त्वं रथासहा युवस्व पोष्या वसो। आन्नो वायो मधु पिबास्माकं सवना गहि॥

लिप्यन्तरण

yukṣvā hi tvaṁ rathāsahā yuvasva poṣyā vaso | ānno vāyo madhu pibāsmākaṁ savanā gahi ||

Rigveda 8.26.21

Rigveda 8.26.21
मूल पाठ

तव वायवृतस्पते त्वष्टुर्जामातरद्भुत। अवांस्या वृणीमहे॥

लिप्यन्तरण

tava vāyavṛtaspate tvaṣṭurjāmātaradbhuta | avāṁsyā vṛṇīmahe ||

Rigveda 8.26.22

Rigveda 8.26.22
मूल पाठ

त्वष्टुर्जामातरं वयमीशानं राय ईमहे। सुतावन्तो वायुं द्युम्ना जनासः॥

लिप्यन्तरण

tvaṣṭurjāmātaraṁ vayamīśānaṁ rāya īmahe | sutāvanto vāyuṁ dyumnā janāsaḥ ||

Rigveda 8.26.23

Rigveda 8.26.23
मूल पाठ

वायो याहि शिवा दिवो वहस्वा सु स्वश्व्यम्। वहस्व महः पृथुपक्षसा रथे॥

लिप्यन्तरण

vāyo yāhi śivā divo vahasvā su svaśvyam | vahasva mahaḥ pṛthupakṣasā rathe ||

Rigveda 8.26.24

Rigveda 8.26.24
मूल पाठ

त्वां हि सुप्सरस्तमं नृषदनेषु हूमहे। ग्रावाणं नाश्वपृष्ठं मंहना॥

लिप्यन्तरण

tvāṁ hi supsarastamaṁ nṛṣadaneṣu hūmahe | grāvāṇaṁ nāśvapṛṣṭhaṁ maṁhanā ||

Rigveda 8.26.25

Rigveda 8.26.25
मूल पाठ

स त्वं नो देव मनसा वायो मन्दानो अग्रियः। कृधि वाजाँ अपो धियः॥

लिप्यन्तरण

sa tvaṁ no deva manasā vāyo mandāno agriyaḥ | kṛdhi vājā apo dhiyaḥ ||

स्रोत र सम्पादकीय विवरण

  1. Rigveda Mandala 8, machine-readable Sanskrit and Roman textMandala 8Sanskrit Documents
  2. Rigveda Shakala Samhita, Mandala 8, Sukta 26RV 8.26Vedic Heritage Portal, Ministry of Culture, Government of India
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सामान्य प्रश्न

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सूक्त २६ सनातन धर्म ज्ञान-मानचित्रको एउटा बिन्दु हो। यस पृष्ठले यसलाई शास्त्रीय, दार्शनिक वा जीवन्त परम्पराको सन्दर्भमा राख्छ र यसका शाखा, स्रोत तथा सम्बन्धित मार्गसँग जोड्छ।