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सूक्त ५८

3 मन्त्रों वाला सम्पूर्ण ऋग्वेद सूक्त: संस्कृत पाठ, IAST लिप्यन्तरण और उपलब्ध स्रोत-संगत ऐतिहासिक अंग्रेज़ी अनुवाद।

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सूक्त ५८

3 मन्त्रों वाला सम्पूर्ण ऋग्वेद सूक्त: संस्कृत पाठ, IAST लिप्यन्तरण और उपलब्ध स्रोत-संगत ऐतिहासिक अंग्रेज़ी अनुवाद।

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Rigveda 8.58.1

Rigveda 8.58.1
मूल पाठ

यमृत्विजो बहुधा कल्पयन्तः सचेतसो यज्ञमिमं वहन्ति। यो अनूचानो ब्राह्मणो युक्त आसीत्का स्वित्तत्र यजमानस्य संवित्॥

लिप्यन्तरण

yamṛtvijo bahudhā kalpayantaḥ sacetaso yajñamimaṁ vahanti | yo anūcāno brāhmaṇo yukta āsītkā svittatra yajamānasya saṁvit ||

Rigveda 8.58.2

Rigveda 8.58.2
मूल पाठ

एक एवाग्निर्बहुधा समिद्ध एकः सूर्यो विश्वमनु प्रभूतः। एकैवोषाः सर्वमिदं वि भात्येकं वा इदं वि बभूव सर्वम्॥

लिप्यन्तरण

eka evāgnirbahudhā samiddha ekaḥ sūryo viśvamanu prabhūtaḥ | ekaivoṣāḥ sarvamidaṁ vi bhātyekaṁ vā idaṁ vi babhūva sarvam ||

Rigveda 8.58.3

Rigveda 8.58.3
मूल पाठ

ज्योतिष्मन्तं केतुमन्तं त्रिचक्रं सुखं रथं सुषदं भूरिवारम्। चित्रामघा यस्य योगेऽधिजज्ञे तं वां हुवे अति रिक्तं पिबध्यै॥

लिप्यन्तरण

jyotiṣmantaṁ ketumantaṁ tricakraṁ sukhaṁ rathaṁ suṣadaṁ bhūrivāram | citrāmaghā yasya yoge'dhijajñe taṁ vāṁ huve ati riktaṁ pibadhyai ||

स्रोत और सम्पादकीय विवरण

  1. Rigveda Mandala 8, machine-readable Sanskrit and Roman textMandala 8Sanskrit Documents
  2. Rigveda Shakala Samhita, Mandala 8, Sukta 58RV 8.58Vedic Heritage Portal, Ministry of Culture, Government of India
एक स्पष्ट उत्तर

सामान्य प्रश्न

सूक्त ५८ क्या है?

सूक्त ५८ सनातन धर्म ज्ञान-मानचित्र का एक बिन्दु है। यह पृष्ठ इसे उसके शास्त्रीय, दार्शनिक या जीवंत परम्परा के सन्दर्भ में रखता है और इसकी शाखाओं, स्रोतों तथा सम्बन्धित मार्गों से जोड़ता है।