सूक्त ५८
3 मन्त्रों वाला सम्पूर्ण ऋग्वेद सूक्त: संस्कृत पाठ, IAST लिप्यन्तरण और उपलब्ध स्रोत-संगत ऐतिहासिक अंग्रेज़ी अनुवाद।
3 मन्त्रों वाला सम्पूर्ण ऋग्वेद सूक्त: संस्कृत पाठ, IAST लिप्यन्तरण और उपलब्ध स्रोत-संगत ऐतिहासिक अंग्रेज़ी अनुवाद।
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यमृत्विजो बहुधा कल्पयन्तः सचेतसो यज्ञमिमं वहन्ति। यो अनूचानो ब्राह्मणो युक्त आसीत्का स्वित्तत्र यजमानस्य संवित्॥
लिप्यन्तरणyamṛtvijo bahudhā kalpayantaḥ sacetaso yajñamimaṁ vahanti | yo anūcāno brāhmaṇo yukta āsītkā svittatra yajamānasya saṁvit ||
एक एवाग्निर्बहुधा समिद्ध एकः सूर्यो विश्वमनु प्रभूतः। एकैवोषाः सर्वमिदं वि भात्येकं वा इदं वि बभूव सर्वम्॥
लिप्यन्तरणeka evāgnirbahudhā samiddha ekaḥ sūryo viśvamanu prabhūtaḥ | ekaivoṣāḥ sarvamidaṁ vi bhātyekaṁ vā idaṁ vi babhūva sarvam ||
ज्योतिष्मन्तं केतुमन्तं त्रिचक्रं सुखं रथं सुषदं भूरिवारम्। चित्रामघा यस्य योगेऽधिजज्ञे तं वां हुवे अति रिक्तं पिबध्यै॥
लिप्यन्तरणjyotiṣmantaṁ ketumantaṁ tricakraṁ sukhaṁ rathaṁ suṣadaṁ bhūrivāram | citrāmaghā yasya yoge'dhijajñe taṁ vāṁ huve ati riktaṁ pibadhyai ||
सूक्त ५८ सनातन धर्म ज्ञान-मानचित्र का एक बिन्दु है। यह पृष्ठ इसे उसके शास्त्रीय, दार्शनिक या जीवंत परम्परा के सन्दर्भ में रखता है और इसकी शाखाओं, स्रोतों तथा सम्बन्धित मार्गों से जोड़ता है।