सूक्त ५१
10 मन्त्रों वाला सम्पूर्ण ऋग्वेद सूक्त: संस्कृत पाठ, IAST लिप्यन्तरण और उपलब्ध स्रोत-संगत ऐतिहासिक अंग्रेज़ी अनुवाद।
10 मन्त्रों वाला सम्पूर्ण ऋग्वेद सूक्त: संस्कृत पाठ, IAST लिप्यन्तरण और उपलब्ध स्रोत-संगत ऐतिहासिक अंग्रेज़ी अनुवाद।
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यथा मनौ सांवरणौ सोममिन्द्रापिबः सुतम्। नीपातिथौ मघवन्मेध्यातिथौ पुष्टिगौ श्रुष्टिगौ सचा॥
लिप्यन्तरणyathā manau sāṁvaraṇau somamindrāpibaḥ sutam | nīpātithau maghavanmedhyātithau puṣṭigau śruṣṭigau sacā ||
पार्षद्वाणः प्रस्कण्वं समसादयच्छयानं जिव्रिमुद्धितम्। सहस्राण्यसिषासद्गवामृषिस्त्वोतो दस्यवे वृकः॥
लिप्यन्तरणpārṣadvāṇaḥ praskaṇvaṁ samasādayacchayānaṁ jivrimuddhitam | sahasrāṇyasiṣāsadgavāmṛṣistvoto dasyave vṛkaḥ ||
य उक्थेभिर्न विन्धते चिकिद्य ऋषिचोदनः। इन्द्रं तमच्छा वद नव्यस्या मत्यरिष्यन्तं न भोजसे॥
लिप्यन्तरणya ukthebhirna vindhate cikidya ṛṣicodanaḥ | indraṁ tamacchā vada navyasyā matyariṣyantaṁ na bhojase ||
यस्मा अर्कं सप्तशीर्षाणमानृचुस्त्रिधातुमुत्तमे पदे। स त्विमा विश्वा भुवनानि चिक्रददादिज्जनिष्ट पौंस्यम्॥
लिप्यन्तरणyasmā arkaṁ saptaśīrṣāṇamānṛcustridhātumuttame pade | sa tvimā viśvā bhuvanāni cikradadādijjaniṣṭa pauṁsyam ||
यो नो दाता वसूनामिन्द्रं तं हूमहे वयम्। विद्मा ह्यस्य सुमतिं नवीयसीं गमेम गोमति व्रजे॥
लिप्यन्तरणyo no dātā vasūnāmindraṁ taṁ hūmahe vayam | vidmā hyasya sumatiṁ navīyasīṁ gamema gomati vraje ||
यस्मै त्वं वसो दानाय शिक्षसि स रायस्पोषमश्नुते। तं त्वा वयं मघवन्निन्द्र गिर्वणः सुतावन्तो हवामहे॥
लिप्यन्तरणyasmai tvaṁ vaso dānāya śikṣasi sa rāyaspoṣamaśnute | taṁ tvā vayaṁ maghavannindra girvaṇaḥ sutāvanto havāmahe ||
कदा चन स्तरीरसि नेन्द्र सश्चसि दाशुषे। उपोपेन्नु मघवन्भूय इन्नु ते दानं देवस्य पृच्यते॥
लिप्यन्तरणkadā cana starīrasi nendra saścasi dāśuṣe | upopennu maghavanbhūya innu te dānaṁ devasya pṛcyate ||
प्र यो ननक्षे अभ्योजसा क्रिविं वधैः शुष्णं निघोषयन्। यदेदस्तम्भीत्प्रथयन्नमूं दिवमादिज्जनिष्ट पार्थिवः॥
लिप्यन्तरणpra yo nanakṣe abhyojasā kriviṁ vadhaiḥ śuṣṇaṁ nighoṣayan | yadedastambhītprathayannamūṁ divamādijjaniṣṭa pārthivaḥ ||
यस्यायं विश्व आर्यो दासः शेवधिपा अरिः। तिरश्चिदर्ये रुशमे परीरवि तुभ्येत्सो अज्यते रयिः॥
लिप्यन्तरणyasyāyaṁ viśva āryo dāsaḥ śevadhipā ariḥ | tiraścidarye ruśame parīravi tubhyetso ajyate rayiḥ ||
तुरण्यवो मधुमन्तं घृतश्चुतं विप्रासो अर्कमानृचुः। अस्मे रयिः पप्रथे वृष्ण्यं शवोऽस्मे सुवानास इन्दवः॥
लिप्यन्तरणturaṇyavo madhumantaṁ ghṛtaścutaṁ viprāso arkamānṛcuḥ | asme rayiḥ paprathe vṛṣṇyaṁ śavo'sme suvānāsa indavaḥ ||
सूक्त ५१ सनातन धर्म ज्ञान-मानचित्र का एक बिन्दु है। यह पृष्ठ इसे उसके शास्त्रीय, दार्शनिक या जीवंत परम्परा के सन्दर्भ में रखता है और इसकी शाखाओं, स्रोतों तथा सम्बन्धित मार्गों से जोड़ता है।